Budhari Tati, Padma Shri award: दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा ने पूरे बस्तर अंचल को गौरवान्वित किया. दशकों तक अबूझमाड़ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति के लिए समर्पित रहीं बुधरी ताती का जीवन संघर्ष, सेवा और समाज परिवर्तन की मिसाल है. दंतेवाड़ा के हीरानार गांव से शुरू हुआ बुधरी ताती का सामाजिक सफर शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति और आदिवासी कल्याण के ज़रिये बस्तर अंचल में स्थायी बदलाव की मिसाल बना, जिसे अब पद्मश्री सम्मान के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली ! बस्तर अंचल की दुर्गम पहाड़ियों और अबूझमाड़ के सघन जंगलों से उठी एक साधारण आदिवासी महिला की असाधारण यात्रा को देश ने आखिरकार पहचान दी है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस जमीनी बदलाव का प्रतीक है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति के ज़रिये बस्तर में आकार ले सका। साधारण शुरुआत, असाधारण संकल्पबुधरी ताती का जीवन संघर्षों से भरा रहा। सीमित संसाधन, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और आदिवासी इलाकों में फैली अशिक्षा, गरीबी व नशे की लत, इन सबके बीच उन्होंने हार मानने के बजाय बदलाव की राह चुनी। वर्ष 1986 से उन्होंने गांव-गांव जाकर आदिवासी समाज को शिक्षा के महत्व से जोड़ने का कार्य शुरू किया। उनका मानना रहा कि जब तक परिवार जागरूक नहीं होगा, तब तक समाज में स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है। शिक्षा को बनाया बदलाव का आधारबस्तर जैसे संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा को पहुंचाना आसान नहीं था। बावजूद इसके, बुधरी ताती ने किराए के एक छोटे से मकान में बच्चों के लिए छात्रावास की शुरुआत की। यही प्रयास आगे चलकर “रानी दुर्गावती छात्रावास” के रूप में विकसित हुआ। आज इस छात्रावास से निकले कई बच्चे डॉक्टर, शिक्षक, नर्स, इंजीनियर और सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। ये युवा न सिर्फ अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल रहे हैं, बल्कि अपने समाज के लिए भी प्रेरणा बन चुके हैं। महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति की मुहिमबुधरी ताती का काम केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने आदिवासी महिलाओं को बचत समूहों, स्व-सहायता समूहों और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ-साथ उन्होंने परिवारों के बीच बैठकर नशे के दुष्परिणामों पर संवाद किया। उनकी नशामुक्ति की पहल किसी औपचारिक अभियान की तरह नहीं, बल्कि भरोसे और संवाद पर आधारित रही, जहां वे परिवारों को समझाती थीं कि नशा सिर्फ व्यक्ति नहीं, पूरे समाज को खोखला कर देता है। दशकों की तपस्या को मिला राष्ट्रीय सम्मानबिना किसी बड़े मंच या प्रचार के, ज़मीन पर रहकर किए गए इस काम को अब राष्ट्रीय पहचान मिली है। पद्मश्री सम्मान से नवाज़े जाने पर क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। स्थानीय आदिवासी समाज इसे अपनी जीत मान रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुधरी ताती का मॉडल यह साबित करता है कि स्थायी सामाजिक बदलाव सरकारी योजनाओं के साथ-साथ स्थानीय नेतृत्व और समाज के भरोसे से ही संभव है। नई पीढ़ी के लिए प्रेरणाबुधरी ताती आज भी स्वयं को “समाज की सेवक” मानती हैं। उनका कहना है कि सम्मान उनके काम को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी देता है। बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए उनका जीवन एक जीवंत उदाहरण है कि सीमित साधनों में भी बड़े परिवर्तन किए जा सकते हैं। पद्मश्री सम्मान वास्तव में उस बदलाव की मुहर है, जिसे बुधरी ताती ने दशकों तक चुपचाप, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ ज़मीन से शुरू किया। समाज का है सम्मान- बुधरी ताती पद्मश्री सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए बुधरी ताती कहती हैं, ‘यह सम्मान मेरा नहीं, समाज का है. यह उन 26 वर्षों की सेवा का सम्मान है, जो मैंने अबूझमाड़ से लेकर दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में दी है. मेरे द्वारा पढ़ाए गए बच्चे आज समाज को नई दिशा दे रहे हैं, यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है.’दंतेवाड़ा की इस कर्मयोगिनी को मिलने वाला पद्मश्री न सिर्फ एक व्यक्ति का सम्मान है, बल्कि उन सभी समाजसेवियों का सम्मान है, जो कठिन परिस्थितियों में भी वनांचल के लोगों के जीवन में उजाला फैलाने में जुटे हैं. पद्मश्री सम्मान: भारत के नागरिक सम्मान की गौरवशाली परंपरापद्मश्री सम्मान भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने कला, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, जनसेवा और अन्य विविध क्षेत्रों में असाधारण एवं विशिष्ट योगदान दिया हो।पद्म पुरस्कारों की शुरुआत पद्म पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी। इसके अंतर्गत तीन श्रेणियां हैं- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री ! इनमें पद्मश्री का उद्देश्य जमीनी स्तर पर समाज को दिशा देने वाले व्यक्तियों के कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करना है। पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयन एक पारदर्शी और बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। नामांकन आम नागरिक, राज्य सरकारें, केंद्रीय मंत्रालय और संस्थान कर सकते हैं। प्राप्त प्रस्तावों की जांच एक विशेष पद्म पुरस्कार समिति करती है। समिति की संस्तुति पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति विचार करती है। अंतिम स्वीकृति राष्ट्रपति द्वारा दी जाती है।सम्मान का स्वरूप पद्मश्री सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया पदक (मेडल), प्रशस्ति पत्र (सानद) शामिल होता है। यह सम्मान आमतौर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है। पद्मश्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उस सेवा भावना का सम्मान है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक बदलाव पहुंचाने का कार्य करती है। विशेष रूप से, ग्रामीण, आदिवासी और वंचित वर्गों के लिए कार्य करने वाले लोगों को यह सम्मान सामाजिक प्रेरणा का माध्यम बनाता है।समाज के लिए संदेश ;पद्मश्री सम्मान यह संदेश देता है कि निःस्वार्थ सेवा, ईमानदारी और समर्पण को देश कभी अनदेखा नहीं करता। यह नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। संक्षेप में, पद्मश्री सम्मान भारत की उस परंपरा का प्रतीक है, जहां जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों को सर्वोच्च
वरिष्ठ पत्रकार डॉ.मनोज वर्मा डॉ अंबेडकर नेशनल अवार्ड- 2025 से सम्मानित
दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में आयोजित हुआ सम्मान समारोह , डॉ.मनोज वर्मा को सामाजिक सरोकार और राष्ट्रीय मुद्दों की संसदीय पत्रकारिता एवं सामाजिक कार्यो के लिए डॉ अंबेडकर नेशनल अवार्ड प्रदान किया गया है। वरिष्ठ पत्रकार मनोज वर्मा मीडिया एसोसिएशन फॉर सोशल सर्विस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं । नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार डॉ .मनोज वर्मा को वर्ष 2025 के डॉ अंबेडकर नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में आयोजित सम्मान समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर और शिक्षाविदों की उपस्थिति में वरिष्ठ पत्रकार डॉ.मनोज वर्मा को दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. बाला राम पाणि, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.के.जी.सुरेश, दिल्ली विश्वविद्यालय की संयुक्त कुलानुशासक प्रों गीता सहारे, दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार भागी, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद हरियाणा के पूर्व कुलपति प्रो. राजबीर सोलंकी ने सम्मानित किया। संसद टीवी के वरिष्ठ पत्रकार एंकर डॉ मनोज वर्मा को सामाजिक सरोकार और राष्ट्रीय मुद्दों की संसदीय पत्रकारिता एवं सामाजिक कार्यो के लिए डॉ अंबेडकर नेशनल अवार्ड प्रदान किया गया है। उन्हें सम्मान स्वरूप सम्मान राशि, शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। भारत रत्न डॉ भीमराव अंबेडकर की विचारधारा और सामाजिक न्याय के मूल्यों को समर्पित इस राष्ट्रीय सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है और शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, समाज सेवा और महिला कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस क्षेत्रों की विभूतियों को सम्मानित किया जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित इस सम्मान समारोह का आयोजन फोरम ऑफ एकेडमिक्स फॉर सोशल जस्टिस और संत शेर सिंह रिसर्च एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा किया गया। तीन दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार डा.मनोज वर्मा भारतीय संसद के टीवी चैनल संसद टीवी पर मुद्दा आपका नाम से एक नियमित शो करते हैं जो सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रीय कार्यक्रम है। डॉ.मनोज वर्मा मीडिया एसोसिएशन फॉर सोशल सर्विस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और इस संस्था के माध्यम से पिछले एक दशक से विभिन्न सामाजिक कार्यो को कर रहे हैं। सम्मान समारोह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. के.जी सुरेश ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उसी संघर्ष से एक महान विचारक का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि बाबा साहब न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में सामाजिक न्याय के सबसे सबसे बड़े योद्धा थे और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। प्रो. सुरेश ने पत्रकारिता के क्षेत्र में डॉ. अंबेडकर के योगदान के बारे में बताया। प्रो. के.जी सुरेश ने कहा कि आज के दौर में सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को केंद्र में रखकर पत्रकारिता समय की मांग है और वरिष्ठ पत्रकार डा मनोज वर्मा ने अपने तीन दशकों की पत्रकारिता में सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों की प्राथमिकता में रखा इसलिए ऐसे पत्रकारों का सम्मान समाज की भी कर्तव्य है। ऐसे कार्यो से समाज और पत्रकारिता को सकारात्मक दिशा मिलती है। दिल्ली विश्वविद्यालय की संयुक्त कुलानुशासक प्रो. गीता सहारे ने कहा कि आज भी देश के कई गांवों में जातिगत भेदभाव मौजूद है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों के कारण ही आज महिलाएं शिक्षा और समाज में आगे बढ़ पा रही हैं। पूर्व कुलपति प्रो. राजबीर सोलंकी ने कहा कि भेदभाव से मुक्त समरस और समानता आधारित समाज बनाना ही बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो अजय कुमार भागी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर जैसे महापुरुषों को किसी सीमित दायरे में बांधना एक तरह का अपराध है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब राष्ट्रवादी थे और भारत के सच्चे सपूत थे जिनकी तुलना किसी अन्य महापुरुष से नहीं की जा सकती। सम्मान समारोह में अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.बाला राम पाणि ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में चेतना और जागरूकता फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर सिर्फ एक व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक विचार हैं जो ज्ञान के माध्यम से समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने डॉ अंबेडकर को पाठ्यक्रम में शामिल किया है और नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा में समाज के सभी वर्गों के महान नायकों को छात्रों तक पहुंचाया जा रहा है। डॉ. अंबेडकर नेशनल अवार्ड दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. बाला राम पाणि को प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें राशि. शॉल. स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट भी किया गया। फोरम ऑफ एकेडमिक्स फॉर सोशल जस्टिस और संत शेर सिंह रिसर्च एजुकेशन ट्रस्ट चेयरमैन प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि ये सम्मान हर साल उन लोगों को दिया जाता है जो अपने काम के जरिए समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट वंचित वर्गों के बच्चों को शिक्षा के जरिए आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाविद डॉ. के. योगेश योगेश ने किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो.रमा, अदिति कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. नीलम राठी, महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो.संजीव तिवारी, पीजीडीएवी कॉलेज में हिंदी विभाग के प्रो. मनोज कुमार कैन, आत्माराम कॉलेज के प्रो. संदीप, डीटीयू के प्रो.जयगोपाल शर्मा और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के प्रो हरिओम दहिया एंव डॉ के योगेश को डॉ अंबेडकर नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार मनोज वर्मा लोकनायक जयप्रकाश पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित
नई दिल्ली। भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने अपने विचारों,दर्शन और व्यक्तित्व से देश की दिशा तय की। देश की आजादी की लड़ाई से लेकर वर्ष 1977 तक तमाम आंदोलनों की मशाल थामने वाले जयप्रकाश नारायण ने लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया। भारतीयता और समाजवाद एक दूसरे के पर्याय हैं। सनातन धर्म की शुभ लाभ की संकल्पना का आधुनिक स्वरूप समाजवाद में अभिव्यक्त होता है। लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश जयंती के मौके पर आयोजित जयप्रकाश नारायण सम्मान समारोह के अवसर पर भेजे अपने संदेश में व्यक्त किए। लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र के तत्वाधान में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यटन एंव संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश ने भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया वो हमें प्रेरणा देता है। इस अवसर पर मीडिया एसोसिएशन फॉर सोशल सर्विस के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार मनोज वर्मा को वर्ष 2024 के लोकनायक जयप्रकाश पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया गया। -लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने देश की दिशा तय की – उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ – जेपी ने भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की – केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत – जेपी की जयंती के मौके पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जेपी अवार्ड 2024 का आयोजन इस मौके पर लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र ने लोकनायक जयप्रकाश के सिद्धांतों और मूल्यों को प्रेरणा बनाकर उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजवादी चिंतक और केरल के पूर्व सांसद थापन थॉमसन, विमल कुमार, साहित्यकार ममता कालिया और बुद्धिनाथ मिश्र, भजन गायक अनूप जलोटा, नृत्यांगना नलिनी , पर्यावरणविद सुरेश भाई को जेपी अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया। भारत सरकार केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जेपी अवार्ड 2024 प्रदान किए। लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र के महासचिव अभय सिन्हा ने कहा कि लोकनायक ने देश में लोकतंत्र की रक्षा की रक्षा के लिए संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया और उसी के चलते ही देश की राजनीति में व्यापक परिवर्तन हुआ। जेपी के नेतृत्व में 1975 का आंदोलन देश के इतिहास में एक मील का पत्थर कहा जा सकता है जिसने देश को एक दिशा दी। देश ने आपातकाल का विरोध किया और भारत लोकतंत्र के रास्ते पर चला। इस मौके पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा चक्रपाणि महाराज आदि ने संबोधित किया।