चर्चा में प्रेस फ़्रीडम, नॉर्वे कैसे बना दुनिया में नंबर वन ?

नई दिल्ली। आख़िर नॉर्वे में क्या ख़ास है जो उसे प्रेस की आज़ादी में अव्वल बनाता है. पेरिस स्थित रिपोर्टर्स सां फ़्रोंतिए (आरएसएफ़) एक नॉन-प्रॉफ़िट संगठन है जो दुनियाभर के पत्रकारों और पत्रकारिता पर होने वाले हमलों को डॉक्यूमेंट करने और उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का काम करता है.बीते 10 सालों से प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे लगातार शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि भारत की स्थिति लगातार फिसल रही है और वह बीते पांच सालों में 15 अंक नीचे खिसक कर 157वें स्थान पर पहुंच गया है.इस रिपोर्ट में नॉर्वे के नंबर वन होने की वजह बताते हुए कहा गया है, “प्रेस की आज़ादी की सुरक्षा के लिए नॉर्वे का क़ानूनी ढांचा काफ़ी मज़बूत माना जाता है.””वहां का मीडिया बाज़ार सक्रिय है, जिसमें मज़बूत पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर के साथ विविध निजी क्षेत्र भी शामिल है. साथ ही प्रकाशन कंपनियां व्यापक संपादकीय स्वतंत्रता बनाए रखती हैं.”नॉर्वे पांच में से चार इंडिकेटर्स में दुनिया के 180 देशों में नंबर वन है. सिर्फ़ सामाजिक इंडिकेटर में वह दूसरे स्थान पर है लेकिन वह भी मामूली अंतर से.

नॉर्वे के लोग दुनिया में सबसे ज़्यादा अख़बार पढ़ने वालों में गिने जाते हैं.बीबीसी की 2023 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, नॉर्वे दुनिया के सबसे अधिक इंटरनेट से जुड़े देशों में शामिल है.जुलाई 2022 तक वहां लगभग 54 लाख इंटरनेट यूज़र थे, जो कुल आबादी का 98 फ़ीसदी हिस्सा है. सोशल मीडिया ट्रैफ़िक में फ़ेसबुक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है.पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनआरके नॉर्वे में सबसे ज़्यादा पहुंच और भरोसे वाला मीडिया संगठन माना जाता है. उसके प्रमुख टीवी और रेडियो चैनल बाज़ार में अग्रणी हैं.2022 तक उसकी 94 फ़ीसदी फ़ंडिंग टीवी मालिकों से ली जाने वाली अनिवार्य लाइसेंस फ़ीस से आती थी. इसके बाद से उसे राज्य बजट से एक अलग एनआरके टैक्स के ज़रिए फ़ंडिंग मिल रही है.व्यावसायिक मीडिया क्षेत्र पर ओस्लो स्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह शिब्स्टेड (Schibsted) का दबदबा है. यह समूह प्रमुख राष्ट्रीय अख़बार और क्षेत्रीय अख़बारों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का प्रकाशक है.इसके साथ ही कोपेनहेगन स्थित ‘एगमोंट फ़ोंडेन’ के स्वामित्व वाला टीवी2 ग्रुप भी प्रमुख है, जो देश के सबसे बड़े व्यावसायिक टीवी चैनल का संचालन करता है.हाल के सालों में प्रिंट संस्करणों के पाठकों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है, जबकि ऑनलाइन अख़बारों की सदस्यता लेने वालों की संख्या बढ़ी है.

आरएसएफ़ की रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे समेत नॉर्डिक देशों का प्रदर्शन साल दर साल उम्दा रहा है और वे इस रैंकिंग में टॉप-10 में बने हुए हैं.डेनमार्क चौथे नंबर पर है, स्वीडन पांचवें और फ़िनलैंड छठे नंबर पर है. अपवाद स्वरूप आईसलैंड 12वें स्थान पर है.ग्लोबल इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज़म नेटवर्क की एक रिपोर्ट के अनुसार, “नॉर्वे में मीडिया उपभोग की दर काफ़ी ज़्यादा है और वहां के लोग अच्छी पत्रकारिता के लिए भुगतान करने को तैयार रहते हैं. देश में 42 फ़ीसदी लोग ख़बरों के लिए पैसे चुकाते हैं.”

नॉर्वे के पांच इंडिकेटर्स कैसे हैं?

आरएसएफ़ के अनुसार, कई इंडिकेटर्स में नॉर्वे की स्थिति काफ़ी अच्छी है.

1-मीडिया परिदृश्य
पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर एनआरके ऑडियो-विज़ुअल बाज़ार में सबसे प्रभावशाली है. समाचार प्रसारण में उसका मुख्य प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक चैनल टीवी2 है. डिजिटल क्षेत्र में वीजी अख़बार का ऑनलाइन संस्करण सबसे ज़्यादा पढ़ा जाता है. देश में क़रीब 230 समाचार संस्थान काम कर रहे हैं.

2- राजनीतिक परिदृश्य
नॉर्वे का मीडिया अनुकूल राजनीतिक माहौल में काम करता है. वहां के राजनेता आमतौर पर पत्रकारों को निशाना बनाने या असहज ख़बरों को “फ़ेक न्यूज़” बताकर ख़ारिज करने से बचते हैं. सांसद और सरकारी मंत्री सार्वजनिक सहायता पाने वाले मीडिया संस्थानों के संपादकीय कामकाज में दख़ल नहीं देते.

3- क़ानूनी ढांचा
संविधान अभिव्यक्ति की आज़ादी और सार्वजनिक जानकारी पाने के अधिकार की गारंटी देता है. कई अन्य क़ानून भी इन अधिकारों की सुरक्षा करते हैं. मीडिया उद्योग एक साझा आचार संहिता का पालन करता है. हालांकि सरकार की ओर से संचार डेटा का बड़े पैमाने पर संग्रह पत्रकारों के स्रोतों की सुरक्षा के लिए संभावित ख़तरा माना जाता है.

4- आर्थिक स्थिति
नॉर्वेजियन मीडिया अथॉरिटी मीडिया स्वामित्व की निगरानी, वर्गीकरण और उससे जुड़ी जानकारी प्रकाशित करती है. प्रतिस्पर्धा से जुड़े क़ानून विविध स्वामित्व सुनिश्चित करते हैं, जबकि समाचार मीडिया पर “ज़ीरो वैट” नीति गुणवत्ता और विविधता बनाए रखने में मदद करती है.

5-सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य
नॉर्वे का समाज और सरकार बड़े स्तर पर स्वतंत्र पत्रकारिता और विचारों के आदान-प्रदान का समर्थन करते हैं. हालांकि मीडिया पेशेवरों को कभी-कभी ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.

6- सुरक्षा
पत्रकार आमतौर पर सुरक्षित माहौल में काम करते हैं. शारीरिक हिंसा के मामले कम हैं, लेकिन पत्रकारों को धमकियां मिलना भी आम बात है.

प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स का 25 सालों में कम स्कोर

आरएसएफ़ की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 25 सालों से प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में पूरी दुनिया में कुछ बुनियादी बदलाव आए हैं.इस रिपोर्ट में कहा गया, “प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स के इतिहास में पहली बार दुनिया के आधे से ज़्यादा देश अब प्रेस की आज़ादी के मामले में ‘मुश्किल’ या ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गए हैं.”
“पिछले 25 सालों में इंडेक्स में शामिल 180 देशों और क्षेत्रों का औसत स्कोर कभी इतना कम नहीं रहा.”इसमें कारण बताया गया है, “पिछले एक साल में इंडेक्स का क़ानूनी संकेतक सबसे ज़्यादा गिरा है, जो इस बात का साफ़ संकेत है कि दुनिया भर में पत्रकारिता को तेज़ी से अपराध की तरह देखा जा रहा है.”
“अमेरिकी महाद्वीप में भी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. अमेरिका सात स्थान नीचे खिसक गया, जबकि लैटिन अमेरिका के कई देश हिंसा और दमन के और गहरे दौर में पहुंच गए हैं.”

कैसे तय होता है प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स

आरएसएफ़ प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स को तैयार करते हुए पांच इंडिकेटर्स को ध्यान में रखता है- राजनीतिक, आर्थिक, क़ानूनी, सामाजिक और सुरक्षा.
इन्हीं के आधार पर स्कोर तय किए जाते हैं और फिर रैंकिंग तैयार की जाती है.मसलन, नॉर्वे के मामले में राजनीतिक इंडिकेटर का स्कोर 95.98, आर्थिक का 87.22, क़ानूनी का 91.76, सामाजिक का 92.19 और सुरक्षा का स्कोर 96.46 है.इस साल अब तक नॉर्वे में न तो किसी पत्रकार की हत्या हुई है, न कोई जेल में है जबकि 1 जनवरी 2026 से लेकर अब तक दुनिया भर में 14 पत्रकार मारे गए और 469 मीडिया वर्कर्स और पत्रकार जेल में बंद हैं.जबकि दूसरी तरफ़ भारत के मामले में राजनीतिक इंडिकेटर का स्कोर 21.16, आर्थिक का 32.63, क़ानूनी का 39.59, सामाजिक का 33.65 और सुरक्षा का स्कोर 32.77 है.इस साल अब तक कोई पत्रकार मारा नहीं गया, जबकि दो पत्रकार गिरफ़्तार हुए हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Edit Template

About MASS

At MASS, we unite journalists, writers, and social workers to inspire societal change through media in education, health, and welfare.

© 2024 Created By Power Technologies